अगर आपको horror stories for reading in hindi पसंद हैं, तो रिक्शा वाले बाबा की भूतिया कहानी आपको जरूर पसंद आएगी। यह एक रहस्यमयी Hindi Horror Story है, जिसमें एक लड़का रात के समय गांव जाते हुए एक ऐसे रिक्शा वाले बाबा से मिलता है, जिसका सच जानकर उसके होश उड़ जाते हैं। यह डरावनी कहानी एक सुनसान रास्ते, अमावस्या की रात और एक अनजाने रहस्य के इर्द-गिर्द घूमती है।
अगर आप long horror stories for reading और रहस्यमयी घटनाओं पर आधारित कहानियां पढ़ना पसंद करते हैं, तो यह कहानी आपको अंत तक बांधे रखेगी।
रिक्शा वाले बाबा की भूतिया कहानी की शुरुआत
शहर की भागदौड़ से थककर राहुल आज इतने सालों बाद, अपने नाना-नानी के गाँव जा रहा था — कालीचरनपुर। वह बचपन में एक-दो बार गांव आया था, पर अब तो नाम भी ठीक से याद नहीं था।
ट्रेन रात के ठीक 11:30 बजे एक छोटे से, पुराने स्टेशन पर रुकी। प्लेटफॉर्म पर एक टिमटिमाता बल्ब था, बाकी हर तरफ अंधेरा। न कोई कुली, न कोई यात्री, न कोई आवाज़ — बस झींगुरों की सनसनाहट और दूर कहीं किसी कुत्ते के रोने की आवाज़।
राहुल उतरा। ट्रेन धीरे-धीरे सीटी बजाती हुई अंधेरे में गुम हो गई। अब स्टेशन पर वह बिल्कुल अकेला था।
शुरू में उसे थोड़ा अजीब लगा — इतना सन्नाटा, इतना घना अंधेरा। पर उसने सोचा, गाँव है, गाँवों में तो ऐसा ही होता होगा।
वह स्टेशन से बाहर निकला। सड़क कच्ची थी, टूटी-फूटी। दूर-दूर तक कोई इंसान नहीं। वह धीरे धीरे आगे बढ़ा, तभी अंधेरे से एक हल्की-सी घरघराहट सुनाई दी — एक पुरानी रिक्शा, जिसका इंजन खांसते हुए चल रहा था, धीरे-धीरे पास आई। चलाने वाला एक बूढ़ा आदमी था, झुर्रियों भरा चेहरा, सफेद बाल, आँखें धँसी हुई।
“बाबा, राम-राम,” राहुल ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया”।
बूढ़े बाबा ने कोई जवाब नहीं दिया। बस एक गहरी, भारी आवाज़ में पूछा — “कहाँ जाना है?
“राहुल ने अपने नाना-नानी के गाँव का नाम बताया। कालीचरनपुर।
रिक्शा धीरे-धीरे चल पड़ी। हेडलाइट की पीली रोशनी के अलावा चारों तरफ घुप्प अंधेरा था। सिर्फ पहियों की चरचराहट और इंजन की धीमी आवाज़।
सर्दियों का मौसम था, राहुल ने अपने बैग से स्वेटर निकाली और पहन ली।
राहुल ने ध्यान दिया — बाबा की आँखें कुछ-कुछ लाल हो रही थीं, थकान से, या… कुछ और वजह से। वह पूछना चाहता था, पर रुक गया।
फिर हिम्मत करके बोला — “बाबा, चारों तरफ इतना अंधेरा क्यों है?
“”क्या करें बेटा, पुराना गाँव है। लाइट कभी आती है, कभी नहीं आती,” बाबा ने बिना मुड़े जवाब दिया।
“बाबा, आपका नाम क्या है?” राहुल ने पूछा।
कोई जवाब नहीं आया। सिर्फ रिक्शा की घरघराहट गूँजती रही।
लगभग बीस मिनट बीत चुके थे, तभी बाबा ने अचानक रिक्शा रोक दी।
“बेटा, तुम बैठो, मैं अभी बाथरूम जाकर आता हूँ।
“बाबा उतरे और थोड़ी दूर, झाड़ियों की तरफ चले गए। राहुल अकेला रिक्शा में बैठा रहा। चारों तरफ अंधेरा और सन्नाटा — उसे हल्की घबराहट होने लगी। दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ हो गई।
कुछ देर बाद बाबा लौट आए और रिक्शा फिर से स्टार्ट की। जैसे ही रिक्शा चालू की —
अमावस्या की रात का डरावना रहस्य

अचानक अंधेरे से एक जवान लड़की निकली। लाल जोड़ा पहने हुए — जैसे किसी की दुल्हन हो। वह भागती हुई रिक्शा के पास आई और बोली — “मुझे भी ले चलो…
“पर बाबा ने रिक्शा की रफ़्तार नहीं रोकी, और रिक्शा आगे बढ़ा दी।
“अरे बाबा, रुकिए!” राहुल ने कहा। “उस लड़की को भी तो कहीं जाना था, कम से कम पूछ तो लेते कि उसे कहाँ जाना है!
“बाबा ने प्यार से, पर गंभीर आवाज़ में समझाया — “बेटा, आज अमावस्या की रात है। और आज की रात इस गाँव में, सात बजे के बाद कोई भी घर से बाहर नहीं निकलता।
“राहुल हँस पड़ा। “ये क्या अंधविश्वास है बाबा। और अगर कोई नहीं निकलता, तो वो लड़की तो बाहर घूम रही थी?
“बाबा कुछ नहीं बोले। बस चुपचाप रिक्शा चलाते रहे। उनका चेहरा और सख्त हो गया था।
तभी राहुल का फोन बज उठा। उसके दोस्त विकास का कॉल था।
“हैलो राहुल, कहाँ है यार?
“”अरे यार, बताया था ना, गाँव जा रहा हूँ, नाना-नानी के पास। भूल गया?
“अच्छा, ठीक है। पहुँच गया क्या?”
“नहीं यार, अभी चल ही रहे हैं। पता नहीं कितनी दूर है। बरसों बाद आ रहा हूँ ना, इसलिए अंदाज़ा नहीं कितना और वक़्त लगेगा।”
“ठीक है, पहुँचकर फ़ोन कर देना। बाय।”
“ठीक है, बाय।”
राहुल ने घड़ी देखी — रात के 12:10 बज चुके थे। पूरे चालीस मिनट हो चुके थे रिक्शा में बैठे हुए।
“बाबा, और कितनी देर लगेगी?”
बाबा ने कुछ पल रुककर, धीमी आवाज़ में कहा — “बस बेटा, थोड़ी देर और। तुम चिंता मत करो।”
रिक्शा सुनसान रास्तों पर तेज़ी से दौड़ती रही। रात गहराती जा रही थी, और साथ ही राहुल के मन में एक अजीब-सी बेचैनी भी।
पूरे डेढ़ घंटे बाद, रात करीब एक बजे, रिक्शा एक बहुत पुराने घर के आगे जाकर रुकी। न कोई लाइट, न कोई आहट — बस अंधेरे में डूबा एक साया-सा सुनसान घर।
राहुल नीचे उतरा। यही उसके नाना-नानी का घर था।
“थैंक यू बाबा,” उसने कहा, “बाबा रुकिए, मेरे पास नकद पैसे नहीं हैं, ऑनलाइन ही हैं, और आपके पास कोई QR कोड भी नहीं दिख रहा।”
बाबा ने कुछ नहीं कहा। बिल्कुल सन्नाटा।
राहुल आगे बढ़ा। गेट पुराना, लोहे का था, जंग लगी हुई। उसने धक्का दिया — दरवाज़ा धीरे-धीरे, एक डरावनी चूँ… की आवाज़ के साथ खुला।
उस आवाज़ से अंदर सो रहे नाना जाग गए। उन्होंने छोटी खिड़की से बाहर झाँका — राहुल को देखा। पर अगले ही पल उनके चेहरे का रंग उड़ गया, माथे पर पसीना छलक आया।
राहुल गेट तक पहुँचा और दरवाज़ा खटखटाया — खट्… खट्…
नाना ने दरवाज़ा खोला। “आओ बेटा, अंदर आ जाओ,” उन्होंने जल्दी से कहा, आवाज़ में एक अजीब-सी घबराहट छिपाए हुए।
“रुकिए नानाजी, मुझे पैसे दे दीजिए, उस रिक्शा वाले बाबा को देने हैं।”
नाना ने बाहर सड़क की तरफ देखा। कुछ नहीं दिखा उन्हें।तभी राहुल ने पीछे मुड़कर देखा —और उसके होश उड़ गए।
पीछे सड़क बिल्कुल सुनसान थी। कोई रिक्शा नहीं। कोई बाबा नहीं। जैसे कुछ था ही नहीं वहाँ।
राहुल कुछ बोलने ही वाला था कि नाना ने हाथ पकड़कर कहा — “चलो बेटा, जल्दी अंदर चलो।”
राहुल कुछ बोल नहीं पाया, बस चुपचाप अंदर आ गया। तभी नानी भी जाग चुकी थीं। राहुल ने झुककर उनके पैर छुए।
“बेटा, इतनी दूर से आए हो, भूख लगी होगी। खाना बना रखा है, पहले नहा लो,” नानी ने प्यार से कहा।
राहुल नहाकर आया, खाना भी खाया — पर उसके मन में वो बात लगातार घूम रही थी।
आखिरकार उसने नाना से पूछ ही लिया — “नानाजी, मैं रिक्शा में आया था। खुले पैसे लेने के लिए रिक्शा से उतरकर आपके पास पैसे लेने आया, और तब तक वो रिक्शा गायब हो गई। स्टार्ट होने की भी कोई आवाज़ नहीं आई।”
नाना का चेहरा एकदम पीला पड़ गया। “कौन रिक्शा? कैसी रिक्शा, बेटा राहुल?”
राहुल ने बताया — “वो एक बूढ़े बाबा थे, और बहुत पुरानी रिक्शा थी उनकी।” पर उनके कपड़े तो एकदम नए-नए से लग रहे थे।”
यह सुनकर नाना ने ऊपर आसमान की तरफ देखा, हाथ जोड़े, और धीमी आवाज़ में बुदबुदाए — “भगवान का शुक्र है… रघुबीर बाबा का बहुत-बहुत शुक्र है।”
राहुल चौंक गया। “क्या… क्या आप जानते हैं उन्हें?”
रिक्शा वाले बाबा का असली सच

नाना ने गहरी साँस ली और बोलना शुरू किया —
“हाँ बेटा, जानता हूँ। वो हमारे ही गाँव के थे। बहुत ग़रीब, पर बहुत ही शरीफ़ इंसान। उनकी एक बेटी थी — नाम था उर्वशी। बहुत सुंदर, बहुत सुशील लड़की। शहर में पढ़ती थी।
एक बार जब वो शहर से गाँव वापस आ रही थी, उसके पिता उसे लेने स्टेशन गए थे। तभी रास्ते से बारात जा रही थी, बारातियों को बचाने के चक्कर में रास्ते में उनका एक्सीडेंट हो गया। उस दिन भी… अमावस्या की ही रात थी।
गाँव वाले कहते हैं, तब से वो दोनों वहीं भटकते हैं। लोग कहते हैं — अमावस्या की रात अगर कोई अकेला बाहर दिख जाए, तो उसे वो दोनों दिखते हैं।
वो लड़की जवान थी, उसकी शादी की उम्र थी — इसलिए जो भी उसे दिख जाए, वो उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश करती है।
और रघुबीर बाबा… अगर कोई उस सुनसान सड़क पर अकेला मिल जाए, तो वो उसकी मदद करते हैं। उसे सही-सलामत घर तक पहुँचाते हैं।”
नाना ने राहुल का हाथ पकड़ा, आँखों में नमी और आवाज़ में एक गहरी चेतावनी लिए बोले —
“बेटा, कोई कुछ भी कहे — हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए। ऐसी अमावस्या जैसी रातों को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।”
राहुल खामोश बैठा रहा। खिड़की के बाहर, दूर कहीं अंधेरे में, उसे एक पल के लिए ऐसा लगा जैसे एक हल्की-सी घरघराहट गूँज रही हो — किसी पुरानी रिक्शा के इंजन की तरह।
राहुल आज तक ये घटना नहीं भुला।
— समाप्त —
इस भूतिया कहानी से सीख:
इस दुनिया में कुछ रहस्य ऐसे होते हैं जिन्हें हम अपनी आंखों से देखकर भी समझ नहीं पाते। रात के सुनसान रास्तों पर हमेशा सावधान रहना चाहिए। कई बार जिस चीज से हमें डर लगता है, वही हमारी मदद करने के लिए खड़ी हो सकती है… और कई बार जो चीज मासूम दिखाई देती है, उसके पीछे कोई गहरा रहस्य छिपा हो सकता है।
इसलिए अनजान जगहों और खासकर सुनसान रातों में हमेशा सतर्क रहें। क्योंकि हर कहानी सिर्फ डराने के लिए नहीं होती… कुछ कहानियां हमें सावधान करने के लिए भी होती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Horror stories for reading in Hindi कहां पढ़ सकते हैं?
अगर आपको horror stories for reading in Hindi पसंद हैं, तो आप अलग-अलग तरह की डरावनी हिंदी कहानियां पढ़ सकते हैं, जिनमें भूतिया घटनाएं, रहस्यमयी किस्से और डरावने अनुभव शामिल होते हैं।
2. Long horror stories for reading कौन सी अच्छी होती हैं?
Long horror stories for reading में ऐसी कहानियां ज्यादा पसंद की जाती हैं जिनमें suspense, mystery और डर का धीरे-धीरे बढ़ता हुआ माहौल हो, जैसे गांव, पुराने घर और रहस्यमयी घटनाओं वाली कहानियां।
3. क्या real horror stories सच में होती हैं?
Real horror stories के बारे में अलग-अलग लोगों के अनुभव और मान्यताएं होती हैं। कई लोग अपने साथ हुई डरावनी घटनाओं को साझा करते हैं, जबकि कुछ कहानियां कल्पना पर आधारित होती हैं।
4. रिक्शा वाले बाबा की भूतिया कहानी किस बारे में है?
यह कहानी राहुल नाम के एक लड़के की है, जो रात में गांव जाते समय एक रहस्यमयी रिक्शा वाले बाबा से मिलता है। बाद में उसे बाबा के पुराने रहस्य के बारे में पता चलता है।
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