शादी में आई वो नीली साड़ी वाली औरत | Horror Story in Hindi

शादी में आई नीली साड़ी वाली औरत जिसे कोई नहीं देख सकता था। आखिर वो कौन थी? और क्यों आई थी? पढ़िए रहस्यमयी और डरावनी Horror Story in Hindi


कहानी की शुरुआत

रिया अपने मामा की बेटी की शादी में शामिल होने कानपुर आई थी। पिछले दो साल से वो दिल्ली में जॉब कर रही थी, और परिवार के फंक्शन में आना अब कम ही हो पाता था। इस बार बॉस से बड़ी मुश्किल से चार दिन की छुट्टी मिली थी, तो रिया ने सोचा पूरा एंजॉय करेगी, रिश्तेदारों से मिलेगी, पुरानी यादें ताजा करेगी।

मामा का घर बहुत बड़ा था, पुराने जमाने की हवेली जैसा, तीन मंजिला, बीचोंबीच एक बड़ा आंगन। शादी के तीन दिन पहले से ही घर मेहमानों से भर गया था। हर कमरे में गद्दे बिछे थे, रिश्तेदारों की भीड़, बच्चों का शोर, ढोलक की थाप, सब कुछ एक त्योहार जैसा माहौल बना रहा था।

रिया को घर पहुंचे अभी एक ही दिन हुआ था कि उसकी नजर एक अजीब सी औरत पर पड़ी। वो औरत आंगन के एक कोने में अकेली खड़ी थी, बाकी सबसे थोड़ा हटकर। उम्र यही कोई पैंतीस-चालीस के आसपास रही होगी, लेकिन उसकी खूबसूरती ऐसी थी कि नजर हटती नहीं थी। गोरा रंग, तीखे नाक-नक्श, बड़ी-बड़ी आंखें, और बालों में गजरा लगाए वो बिल्कुल शांत खड़ी थी, ना किसी से बात कर रही थी, ना किसी फंक्शन में हिस्सा ले रही थी। बस देख रही थी, चुपचाप, हर आने-जाने वाले को।

रिया ने अपनी मामी से पूछा, वो कौन हैं, कोने में खड़ी हैं?

मामी ने उस तरफ देखा, फिर उलझन भरे चेहरे से बोलीं, कौन बेटा, कहां?

रिया ने उंगली से इशारा किया, वो देखो, वहां, नीली साड़ी में।

मामी ने ध्यान से देखा, फिर हंस दीं, अरे बेटा, इतनी भीड़ में कोई नीली साड़ी वाली नहीं दिख रही मुझे तो, तुझे कहीं गलतफहमी तो नहीं हो रही।

रिया ने फिर से उस तरफ देखा, औरत अब भी वहीं खड़ी थी, बिल्कुल साफ दिख रही थी। रिया को अजीब लगा कि मामी को वो क्यों नहीं दिखी, लेकिन उसने सोचा शायद भीड़ में ध्यान नहीं गया होगा, इतने सारे लोग जो थे।

वो अजनबी जिसे कोई नहीं जानता था

Horror Story in Hindi में रिया शादी के आंगन में नीली साड़ी वाली रहस्यमयी औरत को देखती हुई

शाम को मेहंदी की रस्म शुरू हुई। सारी लड़कियां और औरतें आंगन में इकट्ठा हुईं, गाने बज रहे थे, हंसी-मजाक चल रहा था। रिया ने फिर उसी औरत को देखा, इस बार वो थोड़ी करीब खड़ी थी, अब भी उतनी ही खामोश, बस देख रही थी सबको, जैसे किसी को ढूंढ रही हो।

रिया ने इस बार अपनी चचेरी बहन नेहा से पूछा, वो कौन आंटी हैं यार, इतनी खूबसूरत हैं लेकिन किसी से बात नहीं कर रहीं।

नेहा ने भी वैसा ही जवाब दिया जैसा मामी ने दिया था, कहां दीदी, मुझे तो कोई नहीं दिख रहा वहां।

रिया को अब सच में अटपटा लगने लगा। उसने तीसरी बार पूछने की कोशिश नहीं की, बस चुपचाप उस औरत को देखती रही। एक अजीब बात और थी, वो औरत जब भी रिया की तरफ देखती, उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान आ जाती, जैसे वो रिया को पहचानती हो, जैसे उसका इंतजार कर रही हो।

रात को खाना खाकर सब अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। रिया को छत के पास वाला एक छोटा कमरा मिला था, अकेला, क्योंकि बाकी सारे कमरे भरे हुए थे। कमरे में एक पुराना पलंग, एक अलमारी, और एक बड़ा सा आईना था जो दीवार के साथ टिका हुआ था।

रिया लेट गई, दिनभर की थकान से आंख जल्दी लग गई।

आधी रात को अचानक उसकी नींद खुली। कमरे में हल्की सी ठंडक थी, हालांकि पंखा बंद था। उसने करवट ली और सामने आईने की तरफ देखा।आईने में वही औरत खड़ी थी।

आईने के पार से आती आवाज

रिया का दिल जोर से धड़कने लगा। उसने पीछे मुड़कर कमरे में देखा, वहां कोई नहीं था। लेकिन आईने में साफ नजर आ रहा था, वही नीली साड़ी वाली औरत, बिल्कुल कमरे के अंदर खड़ी जैसे, हाथ जोड़े, मुस्कुराते हुए, रिया को ही देख रही थी।

रिया ने हिम्मत करके पूछा, आप कौन हैं? क्या आप मुझे जानती है?

आईने में औरत के होंठ हिले, लेकिन आवाज कमरे में नहीं, सीधे रिया के कानों के अंदर आई, जैसे कोई फुसफुसा रहा हो बहुत पास से, बेटा, तुझे नहीं पहचानती मैं? तू तो मेरी ही खून है।

रिया कांप उठी। उसने घबराकर लाइट जलाई। लाइट जलते ही आईने में सिर्फ उसका अपना रिफ्लेक्शन दिखा, कोई औरत नहीं थी।

रिया पूरी रात सो नहीं पाई। सुबह उसने ये बात अपनी मां को फोन पर बताई। मां ने पहले तो हंसकर टाल दिया, फिर रिया की आवाज में डर सुनकर गंभीर हो गईं।

तूने साड़ी का रंग क्या बताया था? मां ने पूछा।

नीली साड़ी, गजरा लगाए हुए, बहुत खूबसूरत सी, रिया ने बताया।

फोन पर कुछ देर सन्नाटा रहा। फिर मां की आवाज में हल्की कंपकंपी आई, बेटा, वो शायद तेरी दादी हो सकती हैं। उनका सबसे पसंदीदा रंग नीला ही था, और शादी-ब्याह में हमेशा गजरा लगाती थीं। लेकिन बेटा, वो तो पंद्रह साल पहले गुजर चुकी हैं, तूने तो उन्हें देखा भी नहीं है ठीक से, बहुत छोटी थी तू जब वो गई थीं।

रिया के रोंगटे खड़े हो गए। उसने घर में रखी पुरानी एल्बम मांगी, मामी से पूछकर एक पुरानी तस्वीर देखी। तस्वीर देखते ही उसका खून जम गया। वही चेहरा, वही आंखें, वही नीली साड़ी, बिल्कुल वैसी ही जैसी रात को आईने में दिखी थी।

शादी वाले दिन का सच

रिया ने फैसला किया कि अब वो डरेगी नहीं, बल्कि पता लगाएगी कि आखिर उसकी दादी की आत्मा उसी से क्यों मिलना चाहती है। उसने घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य, अपने बड़े नाना से बात की, जो अब करीब अस्सी साल के थे और दादी के जमाने की हर बात जानते थे।

बड़े नाना ने बताया कि रिया की दादी की मौत बिल्कुल सामान्य नहीं थी। शादी के दिन ही, ठीक इसी घर में, दादी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। कहा जाता है कि किसी ने उन्हें कुछ खिला दिया था, जलन के मारे, क्योंकि दादी की खूबसूरती और घर में उनकी इज्जत से कुछ रिश्तेदार जलते थे। डॉक्टर वक्त पर नहीं पहुंच पाया, और दादी ने उसी रात दम तोड़ दिया, ठीक उसी कमरे में जहां आज रिया सो रही थी।

रिया के शरीर में सिहरन दौड़ गई। उसने पूछा, तो फिर वो मुझसे क्या चाहती हैं?

बड़े नाना ने गहरी सांस ली, बोले, शायद वो चाहती हैं कि सच सामने आए। इतने सालों से किसी ने उनकी मौत का असली कारण नहीं जाना, सब चुप रहे, परिवार की इज्जत के नाम पर मामला दबा दिया गया।

उस रात रिया फिर उसी कमरे में सोई, इस बार जानबूझकर, हिम्मत जुटाकर। ठीक बारह बजे आईना फिर से चमकने लगा। दादी की परछाई फिर से उभरी, इस बार पहले से ज्यादा साफ, पहले से ज्यादा करीब।

रिया ने पूछा, दादी, आप मुझे क्या बताना चाहती हैं?

आईने में दादी की आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने अपने हाथ से अपने चेहरे की तरफ इशारा किया, फिर धीरे-धीरे अपनी उंगलियां अपने गाल पर रखीं, और चेहरे को किनारे से उठाना शुरू किया, जैसे कोई नकाब हो। रिया की सांसें रुक गईं। चेहरा उतरता चला गया, और नीचे से जो शक्ल निकली वो बिल्कुल सड़ी हुई, काली पड़ी हुई थी, जैसे किसी जहर ने अंदर से सब कुछ खा लिया हो।

पुराने कमरे के आईने में दादी की डरावनी परछाई देखकर घबराई हुई रिया

दादी की आत्मा ने कांपती आवाज में कहा, ये है मेरा असली चेहरा बेटा, जो जहर ने बनाया था। जिसने ये जहर दिया था, वो आज भी इस घर में है, इसी शादी में शामिल है, हंसती-मुस्कुराती हुई, जैसे कुछ हुआ ही ना हो।

रिया ने कांपते हुए पूछा, कौन है वो?

दादी ने सिर्फ इतना कहा, कल तुझे खुद दिख जाएगी, वो जो सबसे ज्यादा मीठा बोलेगी।

असली चेहरे वाली

अगली सुबह शादी की रस्में जोरों पर थीं। रिया पूरे दिन ध्यान से हर रिश्तेदार को देखती रही, हर किसी की बातचीत सुनती रही। दोपहर को उसकी नजर एक बुजुर्ग औरत पर पड़ी, जो हर किसी से बहुत मीठी-मीठी बातें कर रही थी, हर किसी की तारीफ कर रही थी, लेकिन उसकी आंखों में कुछ अजीब सी जलन थी।

रिया ने उस औरत के बारे में पता किया, मालूम चला वो घर की सबसे पुरानी रिश्तेदार है, कभी दादी की जेठानी हुआ करती थी। लोग उसे बहुत इज्जत देते थे, लेकिन रिया को उसकी मुस्कान में कुछ खटक रहा था।

शाम को जब वो औरत रिया के पास आकर मीठी बातें करने लगी, रिया ने अचानक पूछ लिया, आपको दादी की याद आती होगी ना, कितनी अच्छी थीं वो।

औरत के चेहरे का रंग एक पल के लिए उड़ गया, फिर संभलते हुए बोली, हां बेटा, बहुत अच्छी थीं, भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।

लेकिन उस एक पल में रिया ने देख लिया था, वो डर, वो घबराहट, जो असली मुस्कान के पीछे छिपी थी। रात को रिया ने अपने बड़े नाना को ये बात बताई। बड़े नाना ने बहुत देर तक कुछ नहीं कहा, फिर बोले, मुझे भी हमेशा शक था बेटा, लेकिन सबूत कभी नहीं मिला। शायद अब वक्त आ गया है सच बाहर लाने का, परिवार की झूठी इज्जत के लिए अब और चुप नहीं रहा जा सकता।

बड़े नाना ने उसी वक्त किसी पर सीधा आरोप लगाने से मना कर दिया।

“सिर्फ शक के आधार पर किसी को दोषी ठहराना ठीक नहीं होगा,” उन्होंने कहा। “हमें पहले कोई सबूत ढूंढना होगा।”

रिया ने सिर हिलाया।

अगली सुबह रिया ने दादी से जुड़ी पुरानी चीजें ढूंढनी शुरू कर दीं। उसे खुद नहीं पता था कि वह क्या तलाश कर रही है, लेकिन उसके मन में बार-बार दादी की वही बात गूंज रही थी—

“वो जो सबसे ज्यादा मीठा बोलेगी।”

पुराने स्टोर रूम में उसे एक संदूक मिला। उसमें पंद्रह साल पुरानी शादी के खर्चों की एक डायरी रखी थी।

रिया ने डायरी के पन्ने पलटने शुरू किए।

अचानक उसकी नजर एक लाइन पर जाकर रुक गई।

“रात करीब साढ़े नौ बजे दादी के लिए दूध शारदा जेठानी ने अपने हाथों से पहुंचाया।”

रिया का दिल जोर से धड़कने लगा।

शारदा।

यही वही बुजुर्ग महिला थी, जो इस शादी में हर किसी से बहुत मीठी-मीठी बातें कर रही थी।

रिया तुरंत डायरी लेकर बड़े नाना के पास पहुंची।

डायरी देखते ही बड़े नाना कुछ देर तक चुप रहे।

फिर बोले, “मुझे याद है। उस रात दादी के बीमार पड़ने से कुछ देर पहले शारदा उनके कमरे में गई थी। लेकिन तब किसी ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया।

”रिया ने पूछा, “क्या दादी को दूध के अलावा किसी ने कुछ और दिया था?”

बड़े नाना ने सिर हिलाया।

“जहां तक मुझे याद है, नहीं।”

रिया को अब यकीन होने लगा था कि दादी की बात का इशारा शारदा की तरफ ही था।

लेकिन फिर भी कोई पक्का सबूत नहीं था।

उस रात रिया फिर उसी कमरे में सोने चली गई।

ठीक बारह बजे आईना फिर धुंधला होने लगा।

नीली साड़ी में दादी की परछाई धीरे-धीरे आईने में दिखाई दी।

रिया ने कांपते हुए पूछा—

“दादी… क्या शारदा ने आपको जहर दिया था?”

दादी ने कोई जवाब नहीं दिया।

उन्होंने बस अपना हाथ उठाया और कमरे की पुरानी अलमारी की तरफ इशारा किया।

रिया ने अलमारी खोली।

पुराने कपड़ों और कागजों के नीचे उसे एक छोटी सी चांदी की डिब्बी मिली।

डिब्बी खोलते ही उसके हाथ कांपने लगे।

अंदर एक पुरानी अंगूठी थी।

अंगूठी के अंदर एक अक्षर खुदा था—

“श”

रिया समझ गई कि ये कोई मामूली संयोग नहीं था।

सुबह उसने वह अंगूठी बड़े नाना को दिखाई।

अंगूठी देखते ही बड़े नाना का चेहरा बदल गया।

“ये शारदा की अंगूठी है,” उन्होंने धीमी आवाज में कहा। “मैंने इसे बहुत साल पहले उसके हाथ में देखा था।”

अब रिया के पास दो बातें थीं—

दादी को दूध शारदा ने दिया था।

और उसकी अंगूठी दादी के कमरे में मिली थी।

लेकिन बड़े नाना अभी भी जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहते थे।

उसी दिन रिया ने शारदा पर नजर रखना शुरू कर दी।

शारदा हमेशा की तरह सबके साथ बहुत प्यार से बात कर रही थी।

किसी की तारीफ कर रही थी, किसी को मिठाई खिला रही थी, किसी को आशीर्वाद दे रही थी।

रिया उसके पास जाकर बैठ गई।

“चाची, आपको दादी की याद आती होगी ना?”

शारदा की मुस्कान एक पल के लिए रुक गई।

“हां बेटा… बहुत याद आती है।”

रिया ने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा—

“उनकी मौत वाली रात आप उनके कमरे में गई थीं?”

शारदा का चेहरा एक पल के लिए सफेद पड़ गया।

लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया।

“अरे बेटा, पंद्रह साल पुरानी बात कौन याद रखता है?”

रिया कुछ नहीं बोली।

लेकिन अब उसे यकीन हो चुका था कि शारदा कुछ छिपा रही है।

आखिरी सच

उस शाम बड़े नाना ने पूरे परिवार को आंगन में इकट्ठा किया।

उन्होंने सबसे पहले पुरानी डायरी सबके सामने रखी।

“इसमें लिखा है कि दादी को आखिरी बार दूध शारदा ने दिया था।”

पूरे आंगन में खामोशी छा गई।

फिर रिया ने चांदी की अंगूठी सबके सामने रख दी।

“और मुझे ये अंगूठी दादी के कमरे में मिली।”

शारदा की नजर जैसे ही अंगूठी पर पड़ी, उसके चेहरे का रंग उड़ गया।

रिया के हाथ में अंगूठी देखकर घबराई हुई शारदा और सामने खड़ा परिवार

बड़े नाना ने सीधे उससे पूछा—

“शारदा, सच क्या है?”

शारदा चुप रही।

“पंद्रह साल पहले उस रात तुम दादी के कमरे में क्यों गई थीं?”

शारदा की आंखों में आंसू आ गए।

कुछ देर तक वह कुछ नहीं बोली।

फिर अचानक उसके कंधे झुक गए।

“हां… मैं गई थी।”

रिया की सांस अटक गई।

शारदा रोते हुए बोली—

“मैं उनसे जलती थी। हर कोई उनकी तारीफ करता था। इस घर में उनकी इतनी इज्जत थी कि मुझे लगता था मेरी कोई कीमत ही नहीं है।”

बड़े नाना ने कांपती आवाज में पूछा—

“क्या तुमने उन्हें जहर दिया था?”

शारदा ने सिर झुका लिया।

“हां।”

पूरा आंगन सन्न रह गया।

“लेकिन मैंने नहीं सोचा था कि वो मर जाएंगी,” शारदा रोते हुए बोली। “मैं बस उन्हें कोमा में डालना चाहती थी।”

पंद्रह साल से दबा हुआ सच आखिरकार सबके सामने आ चुका था।

पुलिस को बुलाया गया और पुलिस शारदा को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई।

उस रात के बाद रिया ने फिर कभी आईने में दादी को नहीं देखा।

शायद दादी की आत्मा को आखिरकार वो मिल गया था जिसकी उसे तलाश थी—

सच और इंसाफ।

—समाप्त—

रिया दिल्ली वापस लौट आई, लेकिन वो रात, वो आईना, और दादी का वो उतरता हुआ चेहरा, वो मंजर वो कभी नहीं भूल पाई।

अगर आपको भी रिया की यह कहानी पढ़कर रूह कांप गई हो, और अगर आपके परिवार में भी कोई ऐसा अनसुना, अनकहा किस्सा दबा हुआ है, तो हमें comment करके जरूर बताइए।


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